फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद ने एडवांस हिप फ्रैक्चर सर्जरी की सहायता से 92 और 95-वर्षीय मरीजों की खोयी मोबिलिटी लौटायी

*फरीदाबाद, 29 जुलाई, 2026*: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने 92-वर्षीय पुरुष और 95-वर्षीय महिला मरीज की सफल सर्जरी कर उनकी मोबिलिटी लौटायी और साथ ही, यह भी साबित कर दिखाया कि उन्नत उपचार की राह में अधिक उम्र भी बाधा नहीं बन सकती। ये दोनों ही मरीज, अपने घरों में गिरने के बाद कूल्हे में गंभीर फ्रैक्चर की समस्या से जूझ रहे थे। चोट लगने के बाद से दोनों मरीजों का जीवन पिछले कई महीनों से बिस्तर तक सिमट चुका था। *डॉ हरीष घूटा, डायरेक्टर, ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद* ने इन मरीजों का एडवांस ऑर्थोपिडिक सर्जिकल प्रक्रियाओं से सफलतापूर्वक उपचार किया, और उनकी अधिक उम्र तथा अन्य कई मेडिकल चुनौतियों के बावजूद शीघ्र मोबिलिटी तथा रिकवरी हासिल करने में मदद की।
पहले मामले में, 92-वर्षीय मरीज अपने घर में बिस्तर से गिर गए थे जिसकी वजह से उनकी बायीं जांघ की हड्डी में, कूल्हे के जोड़ के नजदीक काफी गंभीर फ्रैक्चर हुआ था। कूल्हे और आसपास तेज दर्द तथा सूजन की वजह से वह अपने आप चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके थे। उनकी अधिक उम्र, कमजोर हड्डियों और पहले से मौजूद अन्य कई मेडिकल कंडीशंस के चलते, जिनमें डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन भी शामिल थे, इस मामले को काफी अधिक जोखिमपूर्ण तथा चुनौतियों से भरा हुआ माना जा रहा था।
उक्त मरीज की एक्स-रे जांच, ईसीजी और खून की जांच समेत अन्य कई प्रकार के डायग्नॉस्टिक टेस्ट के बाद उनकी सफलतापूर्वक हेमीआर्थ्रोप्लास्टी की गई। यह एक प्रकार की सफल सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें हिप ज्वॉइंट के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम इंप्लांट लगाया जाता है। करीब एक घंटे चली इस सर्जरी के दौरान, सर्जन्स ने उनके हिप ज्वॉइंट में गेंद के आकार के टूटे हिस्से को हटाकर प्रोस्थेटिक इंप्लांट लगाया जिससे उनकी मूवमेंट लौटी और वह काफी जल्दी ही मोबिलिटी भी दोबारा हासिल कर पाए। मरीज की रिकवरी ठीक तरीके से होने के बाद उन्हें 3 दिनों में ही अस्पताल से भी छुट्टी मिल गई।
दूसरे मामले में, 95-वर्षीय महिला को तेज दर्द, सूजन और चलने-फिरने में असमर्थता की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अपने घर में वॉशरूम में गिर गई थीं जिसके कारण उनकी बायीं जांघ के ऊपरी हिस्से में, कूल्हे के नजदीक फ्रैक्चर हो गया था। अस्पताल में जरूरी टेस्ट, एक्स-रे, ईसीजी, और खून की जांच के बाद उन्हें सर्जरी के लिए उपयुक्त पाया गया। डॉक्टरों की टीम ने 3 से.मी. आकार का चीरा लगाया और एक स्पेशल मेटल रॉड को उनकी हड्डी में घुसाकर टूटी हड्डी की मरम्मत की। इस मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया में करीब एक घंटे का समय लगा और काफी कम खून बहा जिसका परिणाम यह हुआ कि मरीज उसी दिन चलने लगीं, और साथ ही, लंबे समय पर बिस्तर पर आराम करने की भी जरूरत नहीं रह गई जिससे अन्य कई जटिलताओं से उनका बचाव हुआ। अब वह स्वास्थ्यलाभ कर चुकी हैं और 4 दिनों के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इन दोनों मामलों की विस्तार से जानकारी देते हुए, *डॉ हरीष घूटा, डायरेक्टर, ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद* ने कहा, “बुजुर्गों में कूल्हों की हड्डी टूटना सबसे गंभीर किस्म की चोटों में से है, क्योंकि इसके बाद वे कई अन्य तरह की ऐसी जटिलताओं का शिकार बन सकते हैं जो जीवनघातक भी साबित हो सकती हैं, जैसे निमोनिया, साांस लेने में तकलीफ, बैड सोर, पहले से मौजूद मेडिकल कंडीशन में और गिरावट आना, और साथ ही, समय पर इलाज न मिलने से उनकी मोबिलिटी भी स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यह भी कि 90 साल से अधिक उम्र के मरीजों के मामलों में, बोन क्वालिटी में गिरावट, फिजियोलॉजिकल रिज़र्व घटने तथा अन्य कई प्रकार के रोगों के चलते सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इन मामलों में रक्तस्राव कम से कम करने, एनेस्थीसिया का समय घटाने और शीघ्र मोबिलिटी लौटाने के लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की आवश्यकता थी। हमारा उद्देश्य केवल फ्रैक्चर को ही ठीक करना नहीं था, बल्कि मरीजों को मोबिलिटी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी क्वालिटी लाइफ लौटाना भी था। समय पर उपचार, उन्नत सर्जिकल तकनीकों तथा आपस में तालमेल से मल्टीडिसीप्लीनरी केयर सुनिश्चित करने का नतीजा यह हुआ कि ये दोनों मरीज सफलतापूर्वक स्वास्थ्यलाभ कर सके और उन्होंने अपेक्षित समय से पहले ही मोबिलिटी भी वापस पायी।
*डॉ अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद* ने कहा, “इन मामलों ने एक बार फिर से यह साबित कर दिखाया है कि फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल अत्यधिक कमजोर वृद्धों समेत सभी आयुवर्गों के मरीजों के लिए उन्नत, मरीज-केंद्रित मेडिकल देखभाल उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता पर खरा उतरने में सक्षम है। नब्बे बरस से अधिक उम्र के मरीजों की जटिल ऑर्थोपिडिक चोटों/परेशानियों का उपचार करने के लिए केवल क्लीनिकल विशेषज्ञता ही नहीं बल्कि ऑर्थोपिडिक सर्जनों, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, फिजिशियनों, नर्सिंग टीमों और रिहेबिलिटेशन स्पेश्यलिस्टों के स्तर पर भी भरपूर तालमेल रखना जरूरी होता है। इन दोनों मरीजों की सफल रिकवरी ने हमारी मल्टीडिसीप्लीनरी एप्रोच की ताकत के साथ-साथ हरेक मरीज के लिए समय पर, सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित उपचार सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों को भी दर्शाया है। हम समुदायों के लिए वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर को नज़दीक लाने और किसी भी उम्र के मरीजों को अधिक सेहतमंद, अधिक एक्टिव जीवनशैली का आनंद उठाने का अवसर दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”



