एक अंगदान, कई जिंदगियां – यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सेक्टर-20 फरीदाबाद ने स्कूलों में चलाया अंगदान जागरूकता अभियान

फरीदाबाद, अगस्त 14, 2026: विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग ने एक विशेष सामाजिक जागरूकता पहल की। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक करना और यह संदेश देना था कि *“अंगदान जीवन का उपहार है।”*
इस पहल के तहत 11 और 12 अगस्त को *दिल्ली पब्लिक स्कूल, बल्लभगढ़; डीसी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, फरीदाबाद; डीएवी पब्लिक स्कूल, एनआईटी-3* और रावल कॉन्वेंट स्कूल, बल्लभगढ़ में छात्रों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।
इन इंटरैक्टिव सत्रों में छात्रों को अंगदान के महत्व, ट्रांसप्लांट के लिए अंगों की बढ़ती जरूरत और इस बात की जानकारी दी गई कि एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। डॉक्टरों ने अंगदान से जुड़ी आम गलतफहमियों को भी दूर किया और छात्रों को इस विषय पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ खुलकर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को सही और विश्वसनीय जानकारी देकर उन्हें अपने परिवार और समुदाय में अंगदान जागरूकता के दूत के रूप में तैयार करना था।
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के चेयरमैन एवं एचओडी डॉ. रीतेश शर्मा ने कहा*, “मृत्यु के बाद एक व्यक्ति का अंगदान सात से आठ लोगों तक की जान बचा सकता है। देशभर में हजारों मरीज किडनी, लिवर, हार्ट, फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उपयुक्त डोनर उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों का इंतजार लंबा होता जाता है। हमें जागरूकता, संवेदनशीलता और सही जानकारी के माध्यम से अंगदान की संस्कृति विकसित करने की जरूरत है। युवाओं को जागरूक करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि वे यह संदेश अपने परिवारों तक पहुंचाकर अंगदान पर सार्थक बातचीत को बढ़ावा दे सकते हैं।
अंगदान के वास्तविक प्रभाव को *यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20* में हाल ही में किए गए सफल डीसिज्ड-डोनर किडनी ट्रांसप्लांट के जरिए भी समझाया गया। 20 वर्षीय एक महिला का वर्ष 2019 में पहला किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन 2024 में जटिलताओं के कारण ट्रांसप्लांट की गई किडनी ने काम करना बंद कर दिया और उसे नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी। परिवार में मेडिकल रूप से उपयुक्त लिविंग डोनर उपलब्ध नहीं होने के कारण दूसरे ट्रांसप्लांट की संभावना बेहद कठिन नजर आ रही थी। हालांकि, हाल ही में उसे दिल्ली के एक अस्पताल में ब्रेन-डेड हुए 70 वर्षीय डोनर से किडनी प्राप्त हुई, जिससे उसे जीवन का एक नया अवसर मिला। सफल ट्रांसप्लांट के बाद वह अब तेजी से स्वस्थ हो रही है और अगले महीने सामान्य गतिविधियां शुरू करने तथा नौकरी करने की उम्मीद रखती है।
*डॉ. रीतेश शर्मा ने आगे कहा,हर अंगदाता उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है, जो किसी अपने के ऑर्गन फेलियर से जूझ रहे हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे अंगदान का संकल्प लें, अपने परिवार के सदस्यों से इस फैसले पर चर्चा करें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी इच्छा परिवार को पता हो। अंगदान केवल उदारता का कार्य नहीं है, बल्कि यह ऐसी विरासत है जो किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में आगे भी जीवित रह सकती है। अंगदान का निर्णय लेकर हम दुख को उम्मीद में बदल सकते हैं और ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों को जिंदगी का दूसरा मौका दे सकते हैं।
इस पहल के माध्यम से यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समुदाय में इस विषय पर सही एवं सकारात्मक बातचीत को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अस्पताल भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की दिशा में काम करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं और एक ऐसे संवेदनशील समाज के निर्माण में योगदान दें, जहां हर संभव जीवन को बचाने का प्रयास किया जा सके।



