गर्भावस्था के दौरान हुई गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही युवती की यथार्थ हॉस्पिटल में बची जान

*फरीदाबाद,13 अगस्त 2026*: गर्भावस्था के दौरान हुई एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही एक युवती का यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद में विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की टीम ने सफल इलाज कर उनकी जान बचाई।
जांच में पता चला कि मरीज को लगभग 18 सप्ताह की गर्भावस्था के साथ हाइडेटिडिफॉर्म मोल नाम की गंभीर समस्या थी। इस स्थिति में ज्यादा ब्लीडिंग, सांस से जुड़ी दिक्कतें, थायरॉयड की गंभीर समस्या और मां की जान तक को खतरा हो सकता है।
अस्पताल पहुंचने के समय मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें तेज सांस फूलने की शिकायत थी, शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम था, खून की कमी थी और बीटा-एचसीजी का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण उन्हें गंभीर हाइपरथायरॉयडिज्म हो गया था। जांच में यह भी सामने आया कि मोलर बीमारी का असर फेफड़ों तक पहुंच चुका था।
डॉक्टरों ने पहले दवाओं की मदद से मरीज की हालत को स्थिर करने के बाद गर्भाशय से मोलर टिश्यू निकालने की योजना बनाई थी। लेकिन तय प्रक्रिया से पहले ही उन्हें अचानक तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई, जिसके बाद तुरंत इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ी।
यह सर्जरी आसान नहीं थी। मोलर टिश्यू गर्भाशय के मुंह के आसपास था, जबकि भ्रूण गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में था। ऐसे में सर्जरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने का खतरा था और मरीज की जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालने तक की नौबत आ सकती थी। मरीज को हाइपरथायरॉयडिज्म था। उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी थी और ज्यादा खून बहने की भी आशंका थी, जिसके कारण एनेस्थीसिया और सर्जरी का जोखिम भी काफी बढ़ गया था। ऐसे में प्रसूति एवं स्त्री रोग, पल्मोनोलॉजी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, रेडियोलॉजी और ब्लड बैंक की टीमों ने मिलकर पूरी तैयारी के साथ इलाज किया।
*डॉ. चंचल गुप्ता, डायरेक्टर एवं एचओडी, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद, ने कहा*, “यह हमारे सामने आए सबसे चुनौतीपूर्ण प्रसूति मामलों में से एक था। मरीज को गंभीर ब्लीडिंग, सांस लेने में तकलीफ और हाइपरथायरॉयडिज्म था। ब्लीडिंग को नियंत्रित करने और उनकी जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालने तक की जरूरत पड़ सकती थी। लेकिन पूरी तैयारी और सभी विभागों के बेहतर तालमेल की बदौलत हम इमरजेंसी का सफल इलाज कर सके और मरीज का गर्भाशय भी सुरक्षित रख पाए।
मरीज की सांस से जुड़ी गंभीर परेशानी और फेफड़ों पर पड़े असर को देखते हुए सर्जरी से पहले उनकी स्थिति को स्थिर करना भी जरूरी था। *डॉ. विजय कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद*, ने मरीज की सांस संबंधी जांच की, हाई-रिजॉल्यूशन सीटी स्कैन कराने की सलाह दी और सर्जरी से पहले तथा बाद में उनकी सांस संबंधी देखभाल की निगरानी की।
डॉ. विजय कुमार अग्रवाल ने कहा,हमारी पहली प्राथमिकता मरीज की सांस की तकलीफ को नियंत्रित करना और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर करना था, ताकि उनकी सर्जरी सुरक्षित तरीके से हो सके। फेफड़ों की समस्या, हाइपरथायरॉयडिज्म और लगातार हो रही ब्लीडिंग की वजह से यह मामला बेहद जोखिम भरा था। समय पर इलाज और सभी विभागों के बेहतर तालमेल की वजह से मरीज की सर्जरी सुरक्षित तरीके से की जा सकी।
सर्जरी के दौरान डॉ. भावना जैन के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने मरीज के हाइपरथायरॉयडिज्म*, सांस लेने में परेशानी और ज्यादा खून बहने के खतरे को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी लगातार निगरानी और देखभाल की। पूरी टीम की सावधानी और बेहतर तालमेल की बदौलत सर्जरी सफल रही और डॉक्टर मरीज का गर्भाशय सुरक्षित रख पाए।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरने लगी। उनकी सांस सामान्य होने लगी, शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर हुआ और धीरे-धीरे ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया गया। बाद में किए गए सीने के स्कैन में भी फेफड़ों की स्थिति में स्पष्ट सुधार दिखाई दिया।
मरीज को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि आगे भी उनकी नियमित जांच की जाएगी। इसके लिए समय-समय पर बीटा-एचसीजी टेस्ट किए जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मोलर बीमारी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और भविष्य में अगर दोबारा कोई समस्या हो तो उसका समय रहते पता लगाया जा सके।
श्री परमिंदर सिंह, फैसिलिटी डायरेक्टर, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद, ने कहा*, “ऐसे मामलों में अनुभवी डॉक्टरों, आधुनिक सुविधाओं और सभी विभागों के बेहतर तालमेल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इस मरीज के इलाज में हर मिनट अहम था। हमारी सभी टीमों ने मिलकर समय पर इलाज उपलब्ध कराया, जिसकी बदौलत मरीज की जान बचाई जा सकी और उनका गर्भाशय भी सुरक्षित रखा जा सका। यह सफलता हमारी बेहतर, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान अगर असामान्य ब्लीडिंग, सांस लेने में परेशानी या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही इलाज और अलग-अलग विभागों के बेहतर तालमेल से ऐसी गंभीर स्थितियों में भी मरीज की जान बचाई जा सकती है।



