अनडायग्नोज्ड हेपेटाइटिस अब भी लिवर के लिए बड़ा खतरा, यथार्थ हॉस्पिटल सेक्टर-20, फरीदाबाद ने साइलेंट लिवर डिजीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने का किया आह्वान

फरीदाबाद, जुलाई 27, 2026: विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026 के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद के विशेषज्ञों ने वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली गंभीर लिवर संबंधी बीमारियों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने, उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग, समय पर टीकाकरण तथा शीघ्र उपचार पर विशेष बल दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि रोकथाम और उपचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति होने के बावजूद हेपेटाइटिस आज भी क्रोनिक लिवर डिजीज के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है, क्योंकि अधिकांश मामलों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और बीमारी का पता काफी देर से चलता है।
वायरल हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस के कारण होने वाली लिवर की सूजन है। इनमें हेपेटाइटिस ए और ई के संक्रमण सामान्यतः अल्पकालिक होते हैं और अधिकांश मामलों में स्वतः ठीक हो जाते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लिवर को लगातार नुकसान पहुंचाते रहते हैं। यदि समय पर उपचार न मिले तो यह स्थिति लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण भी बन सकती है। चूंकि यह बीमारी अक्सर बिना किसी चेतावनी के आगे बढ़ती है, इसलिए अधिकांश मरीज तब चिकित्सक के पास पहुंचते हैं जब लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. कपिल शर्मा ने कहा*, “हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह कई वर्षों तक पूरी तरह साइलेंट रह सकता है। अधिकांश लोगों में तब तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जब तक लिवर को गंभीर क्षति नहीं पहुंच जाती। लगातार थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट में असहजता, गहरे रंग का पेशाब और पीलिया जैसे लक्षण आमतौर पर बीमारी के बाद के चरणों में सामने आते हैं। जिन लोगों का कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो, संक्रमित रक्त के संपर्क में आए हों, असुरक्षित इंजेक्शन लगवाए हों, बिना स्टरलाइज किए गए मेडिकल या कॉस्मेटिक उपकरणों का उपयोग हुआ हो अथवा अन्य जोखिम कारक मौजूद हों, उन्हें लक्षणों का इंतजार किए बिना अपनी जांच अवश्य करानी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी का जल्द पता चलता है, उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है और लिवर को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए अत्यधिक प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है तथा आधुनिक एंटीवायरल दवाओं की मदद से अधिकांश हेपेटाइटिस सी संक्रमण का सफलतापूर्वक इलाज संभव है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होना इस बीमारी को समाप्त करने में सबसे बड़ी बाधाएं हैं। उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग, निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम का पालन तथा संभावित संक्रमण के बाद तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने से हेपेटाइटिस के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद हेपेटाइटिस बी का पहला टीका लगवाने और निर्धारित टीकाकरण पूरा कराने पर भी विशेष जोर दिया, ताकि मां से शिशु में संक्रमण को रोका जा सके।
*डॉ. कपिल शर्मा ने आगे कहा इस वर्ष के विश्व हेपेटाइटिस दिवस की थीम ‘हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन’ हमें गलत धारणाओं, सामाजिक कलंक और देर से होने वाली जांच जैसी बाधाओं को दूर करने का संदेश देती है। हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिससे बचाव संभव है और कई मामलों में इसका सफल उपचार या पूर्ण इलाज भी किया जा सकता है। हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण, सुरक्षित इंजेक्शन का उपयोग, केवल स्क्रीन किए गए रक्त का इस्तेमाल, रेजर और टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत वस्तुओं को साझा न करना तथा उच्च जोखिम वाले लोगों की नियमित जांच जैसे सरल कदम अनेक लोगों की जान बचा सकते हैं। साथ ही ऐसा माहौल बनाना भी जरूरी है, जहां लोग बिना किसी डर या झिझक के चिकित्सकीय सलाह और जांच के लिए आगे आएं।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि वे सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों का पालन करें, लिवर संबंधी लगातार बने रहने वाले लक्षणों में स्वयं दवा लेने से बचें तथा हेपेटाइटिस की आशंका होने पर योग्य विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लें। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के विभिन्न वर्गों से भी जागरूकता अभियान को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक लोग हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर जांच और उचित उपचार के महत्व को समझ सकें।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20, फरीदाबाद ने* जन-जागरूकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार के माध्यम से लिवर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अस्पताल ने कहा कि समय पर जांच, टीकाकरण, उचित चिकित्सकीय देखभाल और व्यापक जन-जागरूकता के माध्यम से वायरल हेपेटाइटिस के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा लोगों को लिवर से जुड़ी गंभीर और रोकी जा सकने वाली जटिलताओं से सुरक्षित रखा जा सकता है।



