महिला आरक्षण पर कांगेस का दोहरा चरित्र उजागर, देश की आधी आबादी का छीना हक़ : सीमा त्रिखा

फरीदाबाद 20 अप्रैल । पूर्व शिक्षा मंत्री श्रीमती सीमा त्रिखा ने सोमवार को भाजपा जिला कार्यालय अटल कमल पर आयोजित प्रेस वार्ता में संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक के गिरने पर कांग्रेस और इंडी गठबन्धन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश के चलते यह लोकतंत्र का एक “काला दिन” बन गया। 17 अप्रैल 2026 को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन’ केवल एक विधेयक ही नहीं गिरा, बल्कि विपक्ष का देश की 70 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों की आकांक्षाओं और सपनों पर सीधा प्रहार था। यह दिन देश के सामने यह स्पष्ट कर गया की कौन नारी सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ा है और कौन उसके रास्ते में बांधा बनकर अड़ा है।
श्रीमती सीमा त्रिखा ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपनी विरासत पार्टी कार्यकर्ताओं को सौंपने के बजाय अपनी बेटी इंदिरा गांधी को आगे किया। वहीं आज उसी परिवार के राहुल गांधी को अवसर मिला तो उन्होंने आम महिला कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने के बजाय अपनी बहन प्रियंका को सांसद बनाया। उन्होंने कहा कि यह मानसिकता दर्शाती है कि ये लोग परिवारवाद से बाहर नहीं निकलना चाहते और अपने परिवार के अलावा किसी आम महिला को संसद में पहुंचा कर जनता की सेवा का अवसर नहीं देना चाहते। यह पूरा मुद्दा “परिवारवाद बनाम सामान्य महिला” की लड़ाई को उजागर करता है। विपक्ष नहीं चाहता कि गांव,गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाएं संसद में पहुँचें, क्योंकि इससे उनकी पारिवारिक और वंशवादी राजनीति को चुनौती मिलेगी।
श्रीमती सीमा त्रिखा ने विपक्षी दलों के रवैये पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने विधेयक गिरने के बाद जश्न मनाया, जयघोष किया, वह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है, बल्कि देश की नारी शक्ति का घोर अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को रोकने के लिए अपनी ही महिला जनप्रतिनिधियों को आगे करके महिलाओं के हक को छीनने का काम किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को रोकना किसी भी दृष्टि से “संविधान की जीत” नहीं हो सकता। 17 अप्रैल 2026 का दिन विपक्ष की महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों की “भ्रूण हत्या” के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन-जिन महिला जनप्रतिनिधियों ने इस बिल के खिलाफ वोट किया, उनके हाथ आम महिलाओं के अधिकारों के खून से रंगे हैं और महिला अधिकारों के हनन के प्रतीक के रूप में इतिहास में दर्ज रहेंगे।
श्रीमती सीमा त्रिखा ने कहा कि दशकों तक कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति वंदन बिल लेकर आए और सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की अपील की, लेकिन विपक्ष ने महिलाओं के हितों के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी। सरकार ने 2029 से 33% आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था, फिर भी विपक्ष के विरोध के चलते बिल पास नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने सुनियोजित रणनीति के तहत विधेयक को गिराया और 2/3 बहुमत से थोड़ा कम रह जाना एक सोची-समझी राजनीतिक चाल थी।
श्रीमती सीमा त्रिखा ने कहा कि देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही हैं और समझ रही हैं कि किसने उनके अधिकारों का समर्थन किया और किसने सुनियोजित साजिश कर उनके हक़ को रोकने का काम किया। आने वाले चुनावों में नारी शक्ति इस विश्वासघात का जवाब जरूर देगी और कांग्रेस और इंडी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा । उन्होंने विश्वास जताया कि मोदी जी और भाजपा महिलाओं को उनका हक दिलाकर रहेंगे । प्रेस वार्ता में महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष राजबाला सरधाना, जिला उपाध्यक्ष व महिला मोर्चा प्रभारी सीमा भारद्वाज, अलका भाटिया, अरुणिमा सिंह, प्रभा सोलंकी, रीटा गौसाईं, जिला मीडिया प्रभारी विनोद गुप्ता, जिला कार्यालय सचिव राज मदान उपस्थित रहे ।

Mahesh Gotwal

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