सतत विकास और शांति के साथ भविष्य को सशक्त बनाने में सौर ऊर्जा बेहतर मददगार मानव रचना यूनिवर्सिटी में आयोजित हुआ ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026

फरीदाबाद, 30 सितंबर, 2026: मानव रचना विश्वविद्यालय प्रांगण में दो दिवसीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन हुआ। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं व युवा पेशेवरों ने “शांति और सतत विकास के लिए सौर ऊर्जा: भविष्य को सशक्त बनाना” विषय पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन का उद्देश्य भारत के स्वच्छ, विश्वसनीय, समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) के लिए व्यावहारिक मार्गों की खोज करना था।
मानव रचना शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. अमित भल्ला, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) दीपेंद्र कुमार झा, अतिथियों प्रफुल्ल पाठक, अजय प्रकाश श्रीवास्तव, अश्विनी कुमार, डॉ. मोहम्मद रिहान, डॉ. राहुल वालावलकर और डॉ. आनंदजीत गोस्वामी, डीन डा.संगीता बांगा ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
विशेषज्ञों ने उद्घाटन सत्र में सौर ऊर्जा, सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और शांति के बीच अंतर-संबंधों पर विचार-विमर्श किया। डा.अमित भल्ला व प्रो.डा.दीपेंद्र कुमार झा ने भारत देश के विस्तार लेते सौर पारिस्थितिकी तंत्र यानी सोलर इको सिस्टम 
के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण, आंतरायिकता, ग्रिड एकीकरण, पुनर्चक्रण और घरेलू निर्माण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए इसे देश के सतत विकास में सहायक बताया। इस दौरान ग्रीन हाइड्रोजन, विकेंद्रीकृत माइक्रोग्रिड, एआई-सक्षम ग्रिड प्रबंधन और दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण को भविष्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।
ऊर्जा भंडारण पर केंद्रित एक विशेष सत्र में ग्रिड स्थिरता, फ्रीक्वेंसी विनियमन, रैंपिंग, भीड़भाड़ प्रबंधन और लचीलेपन को बनाए रखने में ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ और ‘पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो’ की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही उपयुक्त नियामक और बाजार तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया।
वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों पर हुई चर्चाओं में ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, बायो-सीएनजी, टिकाऊ विमानन ईंधन, कार्बन कैप्चर और उभरती स्वच्छ तकनीकों का विश्लेषण कर ।मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और उद्योग-शिक्षा जगत के बीच सहयोग को प्रमुख उत्प्रेरक माना।
एसीपीईटी के निदेशक वैभव चौधरी ने ‘इंडस्ट्री लीडरशिप टॉक’ के दौरान स्वच्छ ऊर्जा को आर्थिक विकास और मानव कल्याण से जोड़ा। उन्होंने एआई, ऊर्जा विश्लेषण, ईएसजी, कार्बन अकाउंटिंग, रीसाइक्लिंग और ज़मीनी स्तर की आजीविका के अवसरों पर प्रकाश डाला।
दूसरे दिन का ध्यान वितरित जिम्मेदार ऊर्जा, रूफटॉप सोलर, ग्रामीण विद्युतीकरण और सामुदायिक सौर मॉडल के माध्यम से कार्यान्वयन पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने संपत्ति जीवन-चक्र प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण स्थापना, अभिनव वित्तपोषण, मिनी-ग्रिड, एग्रीवोल्टिक्स (कृषि-सौर प्रणाली), सौर सिंचाई और उत्पादक ऊर्जा उपयोग पर विचार साझा किए।
”सतत ऊर्जा संक्रमण के लिए युवा” सत्र में अपशिष्ट-से-ऊर्जा, बायोगैस, सर्कुलर इकोनॉमी पहल और विश्वविद्यालय ‘लिविंग लैब्स’ को युवाओं द्वारा नवाचार के प्रमुख मंच के रूप में रेखांकित किया गया।
सम्मेलन का समापन “शांति के लिए सौर ऊर्जा” घोषणा के साथ हुआ। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में सराहे गए किसान अरुण कुमार की उपस्थिति में, विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा, लचीले समुदायों, पर्यावरणीय स्थिरता और शांतिपूर्ण समाजों से जोड़ा गया।
वाइस चांसलर प्रो.डा. दीपेंद्र कुमार झा ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन ने इस बात की पुष्टि की कि भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल क्षमता वृद्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी, वित्त, नीति, बुनियादी ढांचा, कौशल, चक्रीयता (Circularity) और समुदायों को एकीकृत किया जाना चाहिए। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण से और 2026 के ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षीय घोषणा पत्र के संदर्भ में, सम्मेलन ने ऐसे ऊर्जा प्रणालियों के दृष्टिकोण को रेखांकित किया जो सतत विकास, लचीलेपन, समावेशी विकास, मानव कल्याण और शांति को बढ़ावा देती हैं।
फरीदाबाद, 30 सितंबर, 2026: मानव रचना विश्वविद्यालय प्रांगण में दो दिवसीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन हुआ। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं व युवा पेशेवरों ने शांति और सतत विकास के लिए सौर ऊर्जा: भविष्य को सशक्त बनाना विषय पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन का उद्देश्य भारत के स्वच्छ, विश्वसनीय, समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) के लिए व्यावहारिक मार्गों की खोज करना था।
मानव रचना शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. अमित भल्ला, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) दीपेंद्र कुमार झा, अतिथियों प्रफुल्ल पाठक, अजय प्रकाश श्रीवास्तव, अश्विनी कुमार, डॉ. मोहम्मद रिहान, डॉ. राहुल वालावलकर और डॉ. आनंदजीत गोस्वामी, डीन डा.संगीता बांगा ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
विशेषज्ञों ने उद्घाटन सत्र में सौर ऊर्जा, सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और शांति के बीच अंतर-संबंधों पर विचार-विमर्श किया। डा.अमित भल्ला व प्रो.डा.दीपेंद्र कुमार झा ने भारत देश के विस्तार लेते सौर पारिस्थितिकी तंत्र यानी सोलर इको सिस्टम के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण, आंतरायिकता, ग्रिड एकीकरण, पुनर्चक्रण और घरेलू निर्माण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए इसे देश के सतत विकास में सहायक बताया। इस दौरान ग्रीन हाइड्रोजन, विकेंद्रीकृत माइक्रोग्रिड, एआई-सक्षम ग्रिड प्रबंधन और दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण को भविष्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।
ऊर्जा भंडारण पर केंद्रित एक विशेष सत्र में ग्रिड स्थिरता, फ्रीक्वेंसी विनियमन, रैंपिंग, भीड़भाड़ प्रबंधन और लचीलेपन को बनाए रखने में ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ और ‘पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो’ की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही उपयुक्त नियामक और बाजार तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया।
वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों पर हुई चर्चाओं में ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, बायो-सीएनजी, टिकाऊ विमानन ईंधन, कार्बन कैप्चर और उभरती स्वच्छ तकनीकों का विश्लेषण कर ।मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और उद्योग-शिक्षा जगत के बीच सहयोग को प्रमुख उत्प्रेरक माना।
एसीपीईटी के निदेशक वैभव चौधरी ने ‘इंडस्ट्री लीडरशिप टॉक’ के दौरान स्वच्छ ऊर्जा को आर्थिक विकास और मानव कल्याण से जोड़ा। उन्होंने एआई, ऊर्जा विश्लेषण, ईएसजी, कार्बन अकाउंटिंग, रीसाइक्लिंग और ज़मीनी स्तर की आजीविका के अवसरों पर प्रकाश डाला।
दूसरे दिन का ध्यान वितरित जिम्मेदार ऊर्जा, रूफटॉप सोलर, ग्रामीण विद्युतीकरण और सामुदायिक सौर मॉडल के माध्यम से कार्यान्वयन पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने संपत्ति जीवन-चक्र प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण स्थापना, अभिनव वित्तपोषण, मिनी-ग्रिड, एग्रीवोल्टिक्स (कृषि-सौर प्रणाली), सौर सिंचाई और उत्पादक ऊर्जा उपयोग पर विचार साझा किए।
”सतत ऊर्जा संक्रमण के लिए युवा” सत्र में अपशिष्ट-से-ऊर्जा, बायोगैस, सर्कुलर इकोनॉमी पहल और विश्वविद्यालय ‘लिविंग लैब्स’ को युवाओं द्वारा नवाचार के प्रमुख मंच के रूप में रेखांकित किया गया।
सम्मेलन का समापन “शांति के लिए सौर ऊर्जा” घोषणा के साथ हुआ। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में सराहे गए किसान अरुण कुमार की उपस्थिति में, विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा, लचीले समुदायों, पर्यावरणीय स्थिरता और शांतिपूर्ण समाजों से जोड़ा गया।
वाइस चांसलर प्रो.डा. दीपेंद्र कुमार झा ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन ने इस बात की पुष्टि की कि भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल क्षमता वृद्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी, वित्त, नीति, बुनियादी ढांचा, कौशल, चक्रीयता (Circularity) और समुदायों को एकीकृत किया जाना चाहिए। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण से और 2026 के ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षीय घोषणा पत्र के संदर्भ में, सम्मेलन ने ऐसे ऊर्जा प्रणालियों के दृष्टिकोण को रेखांकित किया जो सतत विकास, लचीलेपन, समावेशी विकास, मानव कल्याण और शांति को बढ़ावा देती हैं।



